Posts

Showing posts from May, 2020

असमय होने वाली प्राकृतिक आपदाएं

Image
आपदा  एक  प्राकृतिक  या  मानव निर्मित जोखिम  का प्रभाव है जो समाज या  पर्यावरण  को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है आपदा शब्द  ज्योतिष विज्ञान  से आया   है इसका अर्थ होता है कि जब तारे बुरी स्थिति में होते हैं तब बुरी घटनायें होती हैं समकालीन शिक्षा में, आपदा अनुचित प्रबंधित जोखिम के परिणाम के रूप में देखी जाती है, ये खतरे आपदा और जोखिम के उत्पाद हैं। आपदा जो कम जोखिम के क्षेत्र में होते हैं, वे आपदा नहीं कहे जाते हैं, जैसे-निर्जन क्षेत्र में विकासशील देश आपदा का भारी मूल्य चुकाते हैं- आपदा के कारण ९५ % मौतें विकासशील देशों में होती हैं और प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतें २० गुना ज्यादा हैं। औद्योगिक देशों की तुलना में विकाशशील देशों का ( GDP  %). आपदा को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है -एक दुखद घटना, जैसे  सड़क दुर्घटना ,  आग ,  आतंकवादी हमला  या  विस्फोट , जिसमें कम से कम एक पीड़ित व्यक्ति हो। असमय आपदा का प्रबंधन सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों म...

पर्यावरण की हानि

Image
प्रदूषण की समस्या से पर्यावरण का नुकसान ... प्रदूषण की समस्या के कई प्रकार हैं। जैसे जल प्रदूषण की समस्याए वायु प्रदूषण की समस्याए मिट्टी का कटाव व उर्वरता का अभाव, वन विकासए जैव विविधता का अभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण। अति आबादी: इंसान की आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है. 20वीं शताब्दी के शुरू में दुनिया की आबादी 1.6 अरब थी, आज यह 7.5 अरब है और 2050 तक 10 अरब हो जाएगी. इतनी विशाल आबादी प्राकृतिक संसाधनों पर भारी बोझ डाल रही है. संसाधनों तक पहुंचने की होड़ के चलते अफ्रीका और एशियाई महाद्वीप में विवाद भी होने लगे हैं. वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन: हमारी आबोहवा और समुद्री जल कार्बन से भर चुका है. वातावरण में घुली सीओटू पराबैंगनी विकिरण को सोखती और छोड़ती है. इससे हवा गर्म, जमीन और पानी गर्म होते हैं. इस प्रक्रिया के बिना धरती बर्फीली हो जाएगी. लेकिन हवा में कार्बन की अति से सेहत को नुकसान पहुंच रहा है और गर्म होती धरती जलवायु परिवर्तन का सामना भी कर रही है. पूंजीवादने की पर्यावरण की अपरिमित हानि ! पूंजीवादद्वारा हुई पर्यावरण की अपरिमित हानि कभीभी भरनेवाली नहीं है ...

गलत भगति

Image
भक्ती करते करते भी दुःखी हो तो, वो भक्ति गलत है भक्ती करने का तरीका गलत है  फिर ऐसी भक्ति करने से क्या फायदा ? हमे जबतक भक्ति करने की सही विधि का ज्ञान नहीँ होगा तब तक हमें सुखों की प्राप्ति नही हो सकती। वर्तमान समय में सभी नकली ज्ञानहीन धर्मगुरुओं ने श्रद्धालुओं को शास्त्र विरुद्ध भक्ती करवाके इस मनुष्य जीवन को व्यर्थ करवा रहे है। अंधश्रद्धा भक्ति ऐसा केमिकल है जो इंसान को मूर्ख बनाने मे काम आता है . सत भक्ति नहीं करोगे गलत भक्ति करते रहोगे तो परमात्मा भी नहीं बचा सकता यह परमात्मा का संविधान है वेद शास्त्र अनुकूल भक्ति करना चाहिए तब ही हम कोरोना जेसी महामारी से बच सकते हैं  सत भक्ति संत रामपाल जी महाराज जी बता रहे हैं पूरे विश्व में किसी के पास नहीं है संत रामपाल जी महाराज आम इंसान नहीं है कबीर परमेश्वर के अवतार स्वयं आए हुए हैं अपना ज्ञान देने के लिए भाई बहनों से प्रार्थना है मैं सत्य कह रहा हूं आप मानो या मत मानो यह सत्य है आपके सामने जरूर एक दिन आ जाएगी भजन करो उस रब का जो दाता है कुल सबका । सत भक्ति का राज जानने के लिए- •••••••••••••••••••...

सदन कसाई का उद्धार

Image
एक सदन नाम का व्यक्ति एक कसाई के बुचड़खाने में नौकरी करता था। गरीब, सो छल छिद्र मैं करूं, अपने जन के काज। हरणाकुश ज्यूं मार हूँ, नरसिंघ धरहूँ साज।। संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ। जैसे प्रहलाद भक्त की रक्षा के लिए नरसिंह रूप {मुख और हाथ शेर (स्पवद) के, शेष शरीर नर यानि मनुष्य का} धारण करके हिरण्यकशिपु को मारा था। फिर कहा है कि :- गरीब, जो जन मेरी शरण है, ताका हूँ मैं दास। गैल-गैल लागा रहूँ, जब तक धरणी आकाश।। परमेश्वर कबीर जी ने कहा है जो जन (व्यक्ति) किसी जन्म में मेरी शरण में आ गया है। उसके मोक्ष के लिए उसके पीछे-पीछे फिरता रहता हूँ। जब तक धरती-आकाश रहेगा (महाप्रलय तक), तब तक उसको काल जाल से निकालने की कोशिश करता रहूँ। फिर कहा है कि :- गरीब, ज्यूं बच्छा गऊ की नजर में, यूं सांई कूं संत। भक्तों के पीछे फिरै, भक्त वच्छल भगवन्त।। जैसे गाय अपने बच्चे (बछड़े-बछड़ी) पर अपनी दृष्टि रखती है। बच्चा भागता है तो उसके पीछे-पीछे भागती है। अन्य पशुओं स...

शराब है-खराब

Image
नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश करता है शरीर के जो महत्वपूर्ण अंग है फेफड़े,लीवर,गुर्दे हृदय । शराब सबसे पहले इन चारों अंगों को खराब करती है। शराब है खराब, जो व्यक्ति नशा करता है उसका वर्तमान और भविष्य दोनों नऱक ही होते है ! शराब हमारी सभ्यता संस्कृति और संस्कार के समापन का कारण है. शराब मानव जीवन बर्बाद करती है। इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं- भांग तम्बाकू छोतरा, अफीम और शराब गरीबदास कौन करे बंदगी, ये तो करें खराब। शराब व्यक्ति का नाश करती है। इसे त्यागने में ही भलाई है। शराब इतनी खराब है कि यह बसे बसाए खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती हैं। हैं। शराब से छुटकारा पाने का उपाय :- 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अधिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीव...

मृत्युभोज-सामाजिक बुराई

Image
पहले मेरा विचार था कि मृत्युभोज (गिद्धभोज) को पूरी तरह बंद करना बहुत मुश्किल है,इसे बंद करने के बजाय कम करने पर ध्यान देना चाहिए । परन्तु लोकड़ाऊन की वजह से अब नई स्थिति पैदा हो चुकी है,अब इस कुरीति को पूरी तरह बंद किये जाने पर विचार होना चाहिए,  भारत में लगभग डेढ़ महीने से कर्फ्यू लगा हुआ है, इन डेढ़ महीने में पूरे भारत में सैकड़ों मौते हुई होगी, प्रशासन की पूरी सख्ती से मृत्युभोज लगभग बन्द है । कुछ लोग चोरी छिपे कर भी रहे है, लेकिन उसमें भी पहले की तुलना में 10% लोग भी शामिल नही हो रहे है, अभी ना कोई हरिद्वार जा रहा है, ना गाँवो में देवी देवताओं के यहाँ होने वाले भंडारे हो रहे है । फिर भी सबकुछ नॉर्मल चल रहा है, तो मुद्दे की बात यह है कि अभी सबकुछ नॉर्मल है, बिना (गिद्धभोज) खाये भी लोगो का काम  चल ही रहा है, तो क्यों नही इस स्थिति को परमानेंट ही रखा जाये । अभी कम से कम एक साल तक जिले में धारा 144 लगी रहेगी, यानि भीड़भाड़ और सभी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम जिसमे हजारों लोग शामिल होते है, यह सभी बन्द रहेंगे । हो सकता है, कोरोना का ख़ौफ कम होने के बाद प्रशासन की सख्ती कम हो...

Corona Viruses

Image
           क्या है कोरोना वायरस ? कोरोना वायरस एक नई महामारी है जो चीन से फैली है। इस महामारी ने चीन में ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में हाहाकार मचा कर रखा हुआ है। यह संक्रमण तेजी से कई देशों में फैल चुका है तथा अभी तक कई दर्जनों देश जैसे अमेरिका, चीन, थाईलैंड,  हांगकांग, जापान, दक्षिण कोरिया, नेपाल, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका आदि इस प्रकोप की चपेट में आ चुके हैं। भारत में भी कई शहरों राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और मोहाली आदि में इस वायरस से ग्रसित लोग पाए गए हैं जिनको आइसोलेशन में रखा गया है। यह बिल्कुल नई किस्म का वायरस है और यह वायरस जानवरों में पाया जाता है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ था।  कैसे फैलता है कोरोना वायरस? जो लोग मांस  खाते हैं, वह बहुत जल्दी इसके  संक्रमण में आते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह वायरस जहां चीन में मीट मांस की खुली दुकाने हैं और जहां पर अधिकतर  सी-फूड (समुद्र के जीव) मिलता है, वहां से पनपा है। इसी वजह से वहां पर सी-फूड मार्केट को फिलहाल अभी क...