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महामारी क्यो आती है

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महामारी आने के कारण हर सौवें साल आने वाली  महामारी ने दुनिया के किसी कोने को नहीं छोड़ा. करोड़ों इंसानों की जान लेने के साथ-साथ इसने कई इंसानी बस्तियों के तो नामो-निशान तक मिटा दिए. तो क्या है हर सदी में आने वाली इन महामारियों की कहानी. क्यों हर 100 साल में होता है इंसानी सभ्यता पर हमला. क्यों सब कुछ होते हुए भी इन महामारियों के सामने बेबस हो जाता है इंसान. पिछली चार सदियों से हर सौ साल पर अलग अलग महामारियों ने दुनिया पर हमला किया और हर बार लाखों लोगों को बेमौत मार गईं ये महामारियां. हर बार हमने इन महामारियों का इलाज ढूंढने में इतनी देर कर दी कि बहुत देर हो गई. अब तक कब-कब आई महामारी 1720, फिर 1820, इसके बाद 1920 और अब 2020. अब ये इत्तेफाक है या कुछ और पता नहीं. पर पिछले चार सौ सालों में हर सौ साल बाद एक ऐसी महामारी जरूर आई है जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई. हर सौवें साल आने वाली इस महगामारी ने दुनिया के किसी कोने को नहीं छोड़ा. करोड़ों इंसानों की जान लेने के साथ-साथ इसने कई इंसानी बस्तियों के तो नामो-निशान तक मिटा दिए.  स्पेनिश फ्लू महामारी  H1N1 वायरस के क...

"मेरी लाडो"

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“मेरी लाडो” फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया। मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया।। सरगम से लहक उठता मेरा आंगन। चलने से उसके, जब बजती पायलिया।। जल तरंग सी छिड़ जाती है। जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया।। गद -गद दिल मेरा हो जाये। बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया।। कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया। बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया।। दफ्तर से जब लौटकर आऊं। दौड़कर पानी लाती गुड़िया।। मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है। प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया।।

असमय होने वाली प्राकृतिक आपदाएं

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आपदा  एक  प्राकृतिक  या  मानव निर्मित जोखिम  का प्रभाव है जो समाज या  पर्यावरण  को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है आपदा शब्द  ज्योतिष विज्ञान  से आया   है इसका अर्थ होता है कि जब तारे बुरी स्थिति में होते हैं तब बुरी घटनायें होती हैं समकालीन शिक्षा में, आपदा अनुचित प्रबंधित जोखिम के परिणाम के रूप में देखी जाती है, ये खतरे आपदा और जोखिम के उत्पाद हैं। आपदा जो कम जोखिम के क्षेत्र में होते हैं, वे आपदा नहीं कहे जाते हैं, जैसे-निर्जन क्षेत्र में विकासशील देश आपदा का भारी मूल्य चुकाते हैं- आपदा के कारण ९५ % मौतें विकासशील देशों में होती हैं और प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतें २० गुना ज्यादा हैं। औद्योगिक देशों की तुलना में विकाशशील देशों का ( GDP  %). आपदा को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है -एक दुखद घटना, जैसे  सड़क दुर्घटना ,  आग ,  आतंकवादी हमला  या  विस्फोट , जिसमें कम से कम एक पीड़ित व्यक्ति हो। असमय आपदा का प्रबंधन सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों म...

पर्यावरण की हानि

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प्रदूषण की समस्या से पर्यावरण का नुकसान ... प्रदूषण की समस्या के कई प्रकार हैं। जैसे जल प्रदूषण की समस्याए वायु प्रदूषण की समस्याए मिट्टी का कटाव व उर्वरता का अभाव, वन विकासए जैव विविधता का अभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण। अति आबादी: इंसान की आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है. 20वीं शताब्दी के शुरू में दुनिया की आबादी 1.6 अरब थी, आज यह 7.5 अरब है और 2050 तक 10 अरब हो जाएगी. इतनी विशाल आबादी प्राकृतिक संसाधनों पर भारी बोझ डाल रही है. संसाधनों तक पहुंचने की होड़ के चलते अफ्रीका और एशियाई महाद्वीप में विवाद भी होने लगे हैं. वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन: हमारी आबोहवा और समुद्री जल कार्बन से भर चुका है. वातावरण में घुली सीओटू पराबैंगनी विकिरण को सोखती और छोड़ती है. इससे हवा गर्म, जमीन और पानी गर्म होते हैं. इस प्रक्रिया के बिना धरती बर्फीली हो जाएगी. लेकिन हवा में कार्बन की अति से सेहत को नुकसान पहुंच रहा है और गर्म होती धरती जलवायु परिवर्तन का सामना भी कर रही है. पूंजीवादने की पर्यावरण की अपरिमित हानि ! पूंजीवादद्वारा हुई पर्यावरण की अपरिमित हानि कभीभी भरनेवाली नहीं है ...

गलत भगति

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भक्ती करते करते भी दुःखी हो तो, वो भक्ति गलत है भक्ती करने का तरीका गलत है  फिर ऐसी भक्ति करने से क्या फायदा ? हमे जबतक भक्ति करने की सही विधि का ज्ञान नहीँ होगा तब तक हमें सुखों की प्राप्ति नही हो सकती। वर्तमान समय में सभी नकली ज्ञानहीन धर्मगुरुओं ने श्रद्धालुओं को शास्त्र विरुद्ध भक्ती करवाके इस मनुष्य जीवन को व्यर्थ करवा रहे है। अंधश्रद्धा भक्ति ऐसा केमिकल है जो इंसान को मूर्ख बनाने मे काम आता है . सत भक्ति नहीं करोगे गलत भक्ति करते रहोगे तो परमात्मा भी नहीं बचा सकता यह परमात्मा का संविधान है वेद शास्त्र अनुकूल भक्ति करना चाहिए तब ही हम कोरोना जेसी महामारी से बच सकते हैं  सत भक्ति संत रामपाल जी महाराज जी बता रहे हैं पूरे विश्व में किसी के पास नहीं है संत रामपाल जी महाराज आम इंसान नहीं है कबीर परमेश्वर के अवतार स्वयं आए हुए हैं अपना ज्ञान देने के लिए भाई बहनों से प्रार्थना है मैं सत्य कह रहा हूं आप मानो या मत मानो यह सत्य है आपके सामने जरूर एक दिन आ जाएगी भजन करो उस रब का जो दाता है कुल सबका । सत भक्ति का राज जानने के लिए- •••••••••••••••••••...

सदन कसाई का उद्धार

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एक सदन नाम का व्यक्ति एक कसाई के बुचड़खाने में नौकरी करता था। गरीब, सो छल छिद्र मैं करूं, अपने जन के काज। हरणाकुश ज्यूं मार हूँ, नरसिंघ धरहूँ साज।। संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ। जैसे प्रहलाद भक्त की रक्षा के लिए नरसिंह रूप {मुख और हाथ शेर (स्पवद) के, शेष शरीर नर यानि मनुष्य का} धारण करके हिरण्यकशिपु को मारा था। फिर कहा है कि :- गरीब, जो जन मेरी शरण है, ताका हूँ मैं दास। गैल-गैल लागा रहूँ, जब तक धरणी आकाश।। परमेश्वर कबीर जी ने कहा है जो जन (व्यक्ति) किसी जन्म में मेरी शरण में आ गया है। उसके मोक्ष के लिए उसके पीछे-पीछे फिरता रहता हूँ। जब तक धरती-आकाश रहेगा (महाप्रलय तक), तब तक उसको काल जाल से निकालने की कोशिश करता रहूँ। फिर कहा है कि :- गरीब, ज्यूं बच्छा गऊ की नजर में, यूं सांई कूं संत। भक्तों के पीछे फिरै, भक्त वच्छल भगवन्त।। जैसे गाय अपने बच्चे (बछड़े-बछड़ी) पर अपनी दृष्टि रखती है। बच्चा भागता है तो उसके पीछे-पीछे भागती है। अन्य पशुओं स...

शराब है-खराब

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नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश करता है शरीर के जो महत्वपूर्ण अंग है फेफड़े,लीवर,गुर्दे हृदय । शराब सबसे पहले इन चारों अंगों को खराब करती है। शराब है खराब, जो व्यक्ति नशा करता है उसका वर्तमान और भविष्य दोनों नऱक ही होते है ! शराब हमारी सभ्यता संस्कृति और संस्कार के समापन का कारण है. शराब मानव जीवन बर्बाद करती है। इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं- भांग तम्बाकू छोतरा, अफीम और शराब गरीबदास कौन करे बंदगी, ये तो करें खराब। शराब व्यक्ति का नाश करती है। इसे त्यागने में ही भलाई है। शराब इतनी खराब है कि यह बसे बसाए खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती हैं। हैं। शराब से छुटकारा पाने का उपाय :- 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• अधिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीव...