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"मेरी लाडो"

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“मेरी लाडो” फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया। मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया।। सरगम से लहक उठता मेरा आंगन। चलने से उसके, जब बजती पायलिया।। जल तरंग सी छिड़ जाती है। जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया।। गद -गद दिल मेरा हो जाये। बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया।। कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया। बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया।। दफ्तर से जब लौटकर आऊं। दौड़कर पानी लाती गुड़िया।। मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है। प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया।।